ब्रह्माकुमारीज संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी का 104 साल की उम्र में निधन
March 27, 2020 • RAJESH SRIVASTAVA

ब्रह्माकुमारीज संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी का 104 साल की उम्र में निधन

अबुरोड़ सिरोही ब्रह्माकुमारीज संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी का शुक्रवार तड़के 2 बजे देवलोकगमन हो गया। राजयोगिनी दादी जानकी 104 वर्ष की थी उन्होंने माउंट आबू के ग्लोबल हास्पिटल में अंतिम सांस लिया। वो 140 देशों में फैले अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संस्थान का संचालन कर रही थी। संस्थान से लाखों लोग जुड़े हुए हैं , संस्थान की 46 हजार बहनों की वे अभिभावक थी।

दुनिया भर में फैले आठ हजार सेवा केंद्रों की वे मुख्य संचालिका थी। उनके निधन का समाचार मिलते ही पूरी दुनिया में फैले ब्रह्माकुमारीज संस्थान व इससे जुड़े लगों में शोक की लहर छा गई।

संस्थान की ओर से दादी जानकी देवी के ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर बताया गया, प्रिय मित्रों, प्यार भरे विचारों के साथ, हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि हमारी प्रिय दादी जानकी, ब्रह्म कुमारी की आध्यात्मिक प्रमुख, का 27 मार्च को प्रात: 2 बजे निधन हो गया है।

सन् 1916 में जन्मी दादी जानकी आज भी प्रात: चार बजे उठकर ज्ञान, ध्यान, राजयोग और लोगों से मिलना जुलना प्रारंभ करती थी। वे रोजाना करीब दस घंटे सेवा करती थी। वे जीवन पर्यंत दुनिया भर में यात्रा कर महिलाओं, बच्चों के विकास और सुरक्षा के साथ आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए प्रयासरत रहीं।

46 हजार युवा बहनों की अभिभावक
दादी जानकी ने नारी शक्ति को आगे बढ़ाते हुए 46 हजार बहनों को तैयार किया जो लोगों में आध्यात्मिकता के जरिए ज्ञान, राजयोग और साधना से मूल्यनिष्ठता को स्थापित करने में जुटी है। दुनिया की एकमात्र संस्था है जिसके सभी केंद्रों की प्रमुख बहनें होती हैं।

स्वच्छ भारत मिशन ब्रांड एम्बेसडर रही
राजयोगिनी दादी जानकी स्वच्छता के संदर्भ में हमेशा से एक्टिव रही हैं। देश और विदेश में इसके लिए अभियान चलाती रही हैं। इसलिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेसडर बनाया।

35 वर्ष विदेश में रहकर 100 देशों तक ईश्वरीय पैगाम पहुंचाया। दादी जानकी महज 21 वर्ष की उम्र में इस संस्थान के संपर्क में आईं। दीदी जानकी ने ईश्वरीय सेवाओं के लिए पश्चिमी देशों को चुना। 1970 में पहली बार लंदन गईं और 35 वर्षों तक वहीं रहकर सौ से ज्यादा देशों में ईश्वरीय संदेश को पहुंचाया और हजारों-लाखों लोगों को जीवन जीने की कला सिखाया।