गाय का गोबर अब बचाएगा पर्यावरण, गो-काष्ठ अर्थात गोबर के लट्ठे बचाएंगे पेड़ो की जिंदगी 
January 29, 2020 • RAJESH SRIVASTAVA

गाय का गोबर अब बचाएगा पर्यावरण, गो-काष्ठ अर्थात गोबर के लट्ठे बचाएंगे पेड़ो की जिंदगी 

गाय का महत्व प्राचीन काल से माना जाता रहा है , भारत कृषि प्रधान देश होने से गाय का अर्थव्यस्था में प्रमुख कारण मानना जा सकता है। गाय के आध्यात्मिक, धार्मिक, चिकित्सीय और वैज्ञानिक तथ्य गाय को एकमात्र ऐसा पशु सिद्ध करता है जिसका सब कुछ सभी की सेवा के लिए काम आता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गाय के महत्व को दर्शाया और भगवान बालकृष्ण ने गाएं चराने का कार्य गोपाष्टमी से प्रारंभ किया। गाय का दूध, मूत्र, गोबर के अलावा दूध से निकला घी, दही, छाछ, मक्खन आदि मानव जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है। हर दृष्टि से गाय मानव जीवन के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम वरदान सिद्ध हो रही है। 
 
गाय का गोबर अब पर्यावरण के लिए वरदान बनेगा। गाय का गोबर अब पेड़ो की जिंदगी बचाने से साथ ही पर्यावरण का स्वास्थ्य भी बढ़ायेगा। अभी तक गाय के पौष्टिक दूध सहित अन्य दुग्घ उत्पादों के प्रयोग से लोग सेहतमंद हो रहे थे।
 
अब गो-काष्ठ अर्थात गाय के गोबर का प्रयोग पेड़ो की लकड़ी के लट्ठों की तरह किया जा सकेंगे। गो काष्ठ से लकड़ी की तरह के लट्ठों को बनाया जाएगा जिनका प्रयोग लकड़ी के लट्ठों की जगह जलाने के लिए किया जायेगा। इस तरह से गो काष्ठ के लट्ठों के प्रयोग से पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और पेड़ों की जिंदगी बचेगी।
 
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह पहल कानपुर नगर निगम द्वारा की जा रही है। गो-काष्ठ बनाने के लिए जनपद के पनकी स्थित गोशाला में गोबर से लट्ठे बनाने की मशीन लगाई गयी है जिनसे गोबर के लट्ठे बनाये जा रहे है। 
 
नगर आयुक्त कानपुर नगर अक्षय त्रिपाठी के अनुसार कानपुर नगर के शहरी क्षेत्र में संरक्षित गोवंशों से प्राप्त होने वाले गोबर से गो काष्ठ बनाया जा रहा है,  इसके लिए मशीने लगाई गयी है। उन्होंने बताया कि शव दाह केन्द्रो को भी अंतिम संस्कार और क्रिया कर्मो के लिए इस प्रकार से गोवंशों के गोबर से बने काष्ठ के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस तरह से गौ वंशो के मल का निस्तारण के साथ ही पेड़ो की लकड़ी के प्रयोग से बचाने के साथ ही पर्यावरण को भी बचाया जा सकेगा।
 
वही पशु चिकित्साधिकारी कानपुर नगर निगम डॉ. अजय कुमार सिंह के अनुसार गोशाला में संरक्षित गोवंशों के गोबर से जो लटठे बनाये जा रहे है उनका प्रयोग अलाव के लिए भी किया जाएगा जिससे लकड़ी की कटान काफी कम हो जाएगी।