कोरोना जानकारी और बचाव - केजीएमयू रेस्पिरेटरी एवं मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफिसर डॉ सूर्यकांत 
March 20, 2020 • RAJESH SRIVASTAVA

कोरोना जानकारी और बचाव - केजीएमयू रेस्पिरेटरी एवं मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफिसर डॉ सूर्यकांत 

कोरोना को लेकर फैली भ्रांतियों और इससे बचाव के लिए राष्ट्रिय अध्यक्ष नेशनल कॉलेज ऑफ़ चेस्ट फिजिसियन इंडिया और इंडियन कॉलेज ऑफ़ एलर्जी अस्थमा एंड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी के साथ ही किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) लखनऊ, उत्तर प्रदेश में रेस्पिरेटरी एवं मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफिसर डॉ सूर्यकांत ने लोगो को कोरोना से बचाव के तरीको को बताया।

डॉ सूर्यकांत के अनुसार कोरोना चाइना से कुछ एनिमल्स के द्वारा मुख्यता चमगादड़ से फैला, जिसके बाद इसका ट्रांसमिशन संक्रमण ह्यूमन टू ह्यूमन फ़ैल रहा है। हमारे देश में जो कोरोना के मरीज आ रहे है उसमे 90 % से ज्यादा लोग ऐसे है जो विदेशो से आये है या ऐसे लोग जो उनके संपर्क में आये है जहाँ पर कोरोना प्रभावित संख्या ज्यादा है।   

डॉ सूर्यकांत के अनुसार हर बीमारी और संक्रमण का सम्बन्ध हमारी इम्युनिटी से होता है।

अगर इम्युनिटी अच्छी होने पर वायरस , फंगस , बैक्टीरिया अथवा कोई भी जीवाणु या कीटाणु हो उनसे बीमार या संक्रमण होने का खतरा कम होता है।

वही इम्युनिटी कमजोर होने पर चाहे कारण कोई भी हो जैसे डायबिटीज , कुपोषण , एनीमिया आदि अन्य बीमारी होने पर कोरोना से संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है।

डॉ सूर्यकांत के अनुसार भारत में हर्ड इम्युनिटी जिसका मतलब इम्युनिटी इन मासेस अर्थात हम बचपन से ही कीटाणु , जीवाणु , वायरस , बैक्टीरिया से एक्सपोज़ रहते है जबकि दूसरे देशो के लोग हाईजीन के प्रति बहुत ज्यादा सतर्क रहते है।

हाईजीन थ्योरी के अनुसार जब ज्यादा हाईजीन के साथ लोग रहते है तो हर्ड इम्युनिटी कम हो जाती है। वही हमारे यहां हाईजीन स्वक्ष वातावरण नहीं है और हम बचपन से ही एक्सपोज़ है इसलिए हमारी कम्युनिटी की हर्ड इम्युनिटी कुछ ज्यादा है, शायद यह कोरोना के प्रति कारगर हो।

डॉ सूर्यकांत के अनुसार इम्युनिटी पर उम्र का भी प्रभाव पड़ता है। 6 साल के बच्चो और 60 साल से अधिक बुजुर्ग लोगो की इम्युनिटी कम होती है। 6 वर्ष से कम बच्चो में इम्युनिटी पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाती है जबकि 60 वर्षो से अधिक लोगो की इम्युनिटी उम्र के साथ कमजोर हो जाती है। वही गर्भवती महिलाओ में भी इम्युनिटी कम हो जाती है इसलिए छोटे बच्चो , गर्भवती महिलाये और बुजुर्गो में इम्युनिटी कमजोर होने से संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।

डॉ सूर्यकांत के अनुसार इसके आलावा क्रोनिक बीमारिया जैसे सीओपीडी, अस्थमा , किडनी , लीवर , हार्ट की बीमारी के मरीजों को सीवियर संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। 

डॉ सूर्यकांत के अनुसार कोरोना से बचने के लिए इससे डरने की जरूरत नहीं है , बल्कि अपनी इम्युनिटी बढ़ानी चाहिए। स्वास्थ्य आहार लेना चाहिए और इम्युनिटी बढ़ाना चाहिए। 

डॉ सूर्यकांत के अनुसार मीट अंडा आदि खाने से इम्युनिटी नहीं बढ़ती बल्कि कमजोर पड़ती है। डॉ सूर्यकांत के अनुसार हमारी इम्युनिटी फ्रूट्स , ड्राई फ्रूट्स , मौसमी फल और ह्री सब्जियों से बढ़ती है। 

डॉ सूर्यकांत ने मास्क और सैनिटाइज़र को लेकर परेशान न होने और मुँह पर रुमाल अंगौछे और रूपट्टे को लपेटने की सलाह दिया। 

डॉ सूर्यकांत के अनुसार कोरोना संक्रमित व्यक्ति के छींकने खांसने से फैलता है। कोरोना का संक्रमण संक्रमित चीजों को छूने से फ़ैल सकता है इसलिए सावधानी बरतते हुए चीजों को छूने के बाद सुविधानुसार साबुन , पेपर सोप , सैनिटाइज़र से हाथ ठीक तरह से जरूर धो लेना चाहिए। 

डॉ सूर्यकांत के अनुसार कोरोना वायरस ठंढे मौसम और वातावरण में फैलता है। इसलिए ठंढी चीजे खाने से बचने की जरूरत है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लोगो को गर्म चाय , गर्म कॉफी , गर्म पानी , गर्म सूप आदि चीजों का सेवन करना चाहिए। 

डॉ सूर्यकांत के अनुसार कोरोना वायरस हीट लेवाइल होता है और 30 - 35 डिग्री टेम्पेरेचर पहुँचने पर मौसम जैसे जैसे गर्म होगा कोरोना वायरस मर जाएगा। 

डॉ सूर्यकांत के अनुसार लोगो को भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए और अति आवश्यक होने पर घर लौटने पर भाप लेना चाहिए जिससे गले की सेकाई हो जाएगी और यदि कोरोना के संक्रमण से बचाव हो जायेगा। 

डॉ सूर्यकांत के अनुसार संक्रमण से बचने के लिए लोगो को भारतीय सभ्यता का अनुकरण करते हुए लोगो से हाथ न मिलाने के साथ ही हाथ जोड़कर लोगो से अभिवादन करना चाहिए।