कुपोषण से निपटने के लिए अभियान छेड़कर निभाना है जिम्मेदारी 
September 21, 2019 • RAJESH SRIVASTAVA

 

कुपोषण से निपटने के लिए अभियान छेड़कर निभाना है जिम्मेदारी 

 

पिछले काफी समय से कुपोषण भारत में चिंतनीय विषय बना हुआ है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया में एक तिहाई से अधिक कुपोषित बच्चे भारत में रहते है। माना जाता है कि भारत में कुपोषण का एक प्रमुख कारण आर्थिक असमानता है। पोषण में कमी से व्यक्ति और समाज दोनों को दीर्घकालिक नुकसान होता है। उनके बेहतर खिलाए गए साथियों की तुलना में, पोषण की कमी वाले व्यक्तियों में निमोनिया और तपेदिक जैसे संक्रामक रोग होने की अधिक संभावना होती है, जिससे मृत्यु दर अधिक होती है। कुछ जनसंख्या समूहों की कम सामाजिक स्थिति के कारण, उनके आहार में अक्सर गुणवत्ता और मात्रा दोनों का अभाव होता है। वही जो महिलाएं कुपोषण का शिकार होती हैं, उनमें स्वस्थ बच्चे होने की संभावना भी कम होती है। अध्यन और शोध के बाद पाया गया है कि भारत में कम वजन वाले बच्चों की व्यापकता दुनिया में सबसे अधिक है और गतिशीलता, मृत्यु दर, उत्पादकता और आर्थिक विकास को प्रभावित करता है। जब बाल कुपोषण की बात आती है, तो उच्च आय वाले परिवारों की तुलना में कम आय वाले परिवारों में बच्चे अधिक कुपोषित होते हैं। कुपोषण से निपटने के लिए भारत सरकार ने पोषण बच्चों की बढ़ती दर को बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। उनमें से प्रमुख रूप से ICDS, NCF, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन शामिल हैं।

जनपद कानपुर नगर में कुपोषण से जुड़े कार्यक्रमों को अभियान छेड़कर संजीदगी से निभाने का कार्य किया जा रहा है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में कार्यरत बाल विकास परियोजना अधिकारी सीडीपीओ अनामिका सिंह सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर क्षेत्रीय लोगो को जागरूक कर बच्चों का कुपोषण मिटाने की जंग लड़ रही है। उनके प्रयास को सफल बनाने के लिए अब स्थानीय लोगों ने भी हाथ बढ़ाया है। अनामिका के अनुसार दो वर्ष के कार्यकाल में अब परियोजना शहर द्वितीय के 250 केंद्रो मे से कुल 110 केंद्रों में कोई भी बच्चा अतिकुपोषित नहीं है। परियोजना शहर द्वितीय के 250 केंद्रों के करीब 26 हजार बच्चों का वजन किया गया जिसमें 0.74 प्रतिशत बच्चे यानि 192 बच्चे ही अतिकुपोषित चिन्हित किये गए। यह इस बात का प्रमाण है कि कुपोषण जैसी बीमारी अब ज्यादा दोनों तक नहीं टिक पाएगी। 

एक वर्ष पूर्व परियोजना में लगभग 1600 पंजीकृत बच्चे अति कुपोषित थे। जिसको लेकर जिलाधिकारी द्वारा लोगो को जागरूक करके कुपोषण से  लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। अभियान के तहत प्रत्येक माह वजन दिवस मनाकर लोगो में जागरूकता फैलाई गयी। शत प्रतिशत बच्चों का उन्होंने हेल्थ चेक अप किया गया , जिसमें चिन्हित किये गए अतिकुपोषित बच्चो को लाल गुब्बारा, कुपोषित बच्चो को पीला और जो सामान्य श्रेणी के बच्चो को हरा गुब्बारा दिया जाता था। अभियान के तहत कुपोषित बच्चो के अभिभावकों को कुपोषण से निपटने के उपाय बताने के अन्य विषयो पर जागरूक किया जाता है। अधिकारियों के प्रयासों का असर हुआ और 2018 में संख्या 1600 से घटकर 350 ही रह गयी थी और अब वर्तमान में परियोजना शहर द्वितीय में कुल 192 बच्चें ही अतिकुपोषित बचे हैं।