रियल स्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए जल्द ही शुरु होगा समस्या समाधान पोर्टल- केंद्रीय आवासन और शहरी कार्यमंत्री
November 4, 2019 • RAJESH SRIVASTAVA

 

रियल स्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए जल्द ही शुरु होगा समस्या समाधान पोर्टल- केंद्रीय आवासन और शहरी कार्यमंत्री 

केंद्रीय आवासन और शहरी कार्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार जल्द ही माडल टेनन्सी एक्ट- 'आदर्श किराएदारी कानून' ला रही है।

लखनऊ में रेरा के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में एक करोड़ से भी ज्यादा मकान है लेकिन लोग किराए पर देने से डरते है , किराएदारी कानून आने के बाद स्थिति में बदलाव आएगा उन्होंने कहा कि इसी तरह सरकार भू सम्पदा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए भी जल्द ही रियल स्टेट एंड कामर्स पोर्टल भी शुरु करने जा रही है। यह पोर्टल अगले वर्ष 15 जनवरी तक शुरु हो जाएगा और इसके माध्यम से लोगों की समस्यायें हल हो सकेंगी। उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले दो वर्षों के दौरान आवास और शहरी विकास के क्षेत्र में काफी कार्य हुआ है । 2017 तक जहां मेट्रों में काम धीमी गति से था वहीं पिछले दो सालों में न केवल मेट्रो चालू कर दी गयी बल्कि इस समय लगभग 200 किमी. मेट्रो का काम चल रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अमृत योजना में पिछले दो सालों में 14 कार्य पूरे कर लिए गये । चार लाख चौदह हजार शहरी परिवारों को पानी के कनेक्शन दिये गये ।1880 शहरों में भवन निर्माण पर आनलाइन काम शुरु हुआ है और प्रदेश के 10 शहर स्मार्ट सिटी घोषित किए गये है। इन शहरों में 4900 करोड़ रुपये की लागत से 135 परियोजनाओं का काम पूरा कर लिया गया है, जबकि 65 परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी है। उन्होंने कहा कि अब तक स्मार्ट शहरों में 18 से 20 हजार करोड़ रुपये का काम पूरा कर लिया गया है। प्रदेश के सौ फीसदी गांव भारत स्वच्छ अभियान के तहत खुले में शौंच से मुक्त हो गये है और 96 प्रतिशत घरों में शौचालय बना दिये गये है , 95 प्रतिशत सामुदायिक शौचालयों पर काम हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास की चर्चा करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अब तक 93 लाख मकान स्वीकृत किये जा चुके है। उत्तर प्रदेश में साढे चौदह हजार मकान स्वीकृत हो चुके है।

उन्होंने कहा कि कृषि के बाद रियल स्टेट देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। रियल स्टेट क्षेत्र को पहले काली कमाई का साधन माना जाता था, लेकिन रेरा आने के बाद स्थिति बदल गयी है। रेरा कानून लागू होने के समय रियल स्टेट के क्षेत्र में 45 हजार मामले देश की विभिन्न अदालतों में लंबित थे , सरकार के प्रयास से इन सभी को एक साथ कर बाम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई और 12 हजार से भी ज्यादा मामले हल कर लिए गये वही अन्य बहुत से मामले उच्चतम न्यायलय में विचाराधीन है।