टीबी को मात दे चैम्पियन बनने वाले लोग अपने अनुभव साझा कर फैलायेंगे जागरूकता  
February 7, 2020 • RAJESH SRIVASTAVA
टीबी को मात दे चैम्पियन बनने वाले लोग अपने अनुभव साझा कर फैलायेंगे जागरूकता  
 
जनपद में पांच लोगों को किया जाएगा चयनित, टीबी चैंपियन साझा करेंगे अपने अनुभव 
 
जनपद कानपुर नगर में टीबी को मात दे चैम्पियन बनने वाले लोग अपने अनुभव साझा कर समाज को टीबी से बचाव के प्रति जागरूक करेंगे। टीबी को मात दे चैम्पियन बने पांच लोगों को चयनित किया जाएगा जो कभी जो खुद टीबी से ग्रसित थे और जिंदगी से निराश हो चुके थे। चिकित्सको के नेतृत्व और कुशल समाज सेवियो के अथक प्रयासो के साथ नियमित दवाओं का सेवन कर टीबी को मात देने वाले ऐसे लोग अब टीबी की गिरफ्त में आए अन्य लोगों को टीबी से निजात दिलाने के लिये टीबी चैंपियन बनकर जागरूक करेंगे।
 
गौरतलब है कि केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संयुक्त निदेशक, क्षय रोग डॉ संतोष गुप्ता के अनुसार प्रदेश के सभी जिला क्षय रोग अधिकारियों को इस विषय में पत्र जारी  किया है। समाज में क्षय रोग के संबंध में जनमानस को जागरूक करने में यह बहुत उपयोगी साबित होंगे, क्योंकि यह टीबी चैंपियन अपनी आप बीती और अनुभवों को अन्य लोगों तक पहुंचाएंगे। इस रोग को मात दे चुके चैंपियन द्वारा सही तरीके से अपनी बात रखने से क्षय रोगियों के प्रति भेदभाव भी कम होगा।
 
संयुक्त निदेशक के अनुसार वर्तमान में 12 जनपदों में टीबी चैंपियन द्वारा जनपदीय टीबी फोरम में प्रतिभाग, ट्रीटमेंट सर्पोटर तथा सक्रिय खोज अभियान में कार्यकर्ता के रूप में योगदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में तीन से पांच टीबी चैंपियन का चयन किया जाए। चयन में टीबी फ्री ब्लॉक को प्राथमिकता दी जाए। चैंपियन को किसी भी तरह का मानदेय भुगतान नहीं किया जाएगा। 
 
जिला क्षय रोग अधिकारी डा जी के मिश्रा के अनुसार वर्तमान में जनपद में 15,543  टीबी मरीज हैं। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी चैंपियन का चयन किया जाना है। जनपद में पांच टीबी चैंपियन बनाए जाएंगे जो आम लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे। जिससे लोगों में जागरूकता के साथ-साथ टीबी रोगियों में कमी भी आएगी।  
 
कैसे फैलता है टीबी रोग - 
विशेषज्ञों के अनुसार टीबी (क्षय रोग) एक घातक संक्रामक रोग है, जो कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है। टीबी आम तौर पर ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब क्षयरोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होता है जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। ये ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई कई घंटों तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं। जब एक स्वस्थ्य व्यक्ति हवा में घुले हुए इन माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई के संपर्क में आता है तो वह इससे संक्रमित हो सकता है। सक्रिय टीबी के मरीज को अपने मुँह पर मास्क या कपड़ा लगाकर बात करनी चाहिए और मुँह पर हाथ रखकर खाँसना और छींकना चाहिए।